क्या पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह अंधे, बहरे और मौनी बाबा हो चुके हैं? या क्या नोबल पुरस्कार लेना है समर्थकों की आहुति देकर?

यदि इस देश के कानून मे, संविधान मे चुनाव मे जीती हुई राजनैतिक पार्टी के द्वारा हत्या, हिंसा, लूटपाट, बलात्कार और आगजनी करने पर कोई कड़ी कारवाई या इस चुनी हुई पार्टी के इस अराजकता पर चुनाव परिणाम को निरस्त करने का प्रावधान नहीं है तो हमारा विश्वास, जनता का विश्वास इस कानून और संवैधानिक व्यवस्था से उठ जाएगा और फिर कहीं ऐसा न हो कि अपने भाइयों और बहनों को बचाने के लिए लोग सड़क पर निकल कर लड़ मर पड़े।

क्या पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह अंधे, बहरे और मौनी बाबा हो चुके हैं? या क्या नोबल पुरस्कार लेना है समर्थकों की आहुति देकर?

बंगाल मे कई सूत्रों के हवाले से यह खबर निकल कर आई हैकि लगभग सभी विधान सभा क्षेत्र मे टीएमसी का गुंडातंत्र आने वाले दिनों मे लोकतंत्र की लगातार हत्या करनेवाली है, उनका हौसला बढ़ गया है, ये गुंडातन्त्र अपरोक्ष रूप से निर्देशित  है, उन सबकी हत्या का खूनी-खेल जिसे ममता बनर्जी ने खेला होबे के नाम से शुरू हुआ था जीत के बाद खेल शुरू हो चुका है। 

खेला होबे नारा नहीं बंगाल के लोगों की धमकी के रूप मे दिया गया था। बंगाल की जनता इस नारे के पीछे की धमकी को सुन चुके थे और वो सभी इस से भलीभाँति परिचित थे। भाजपा का परिवर्तन मंत्र सोनार बांगला से आज भी वो लोग सहमत हैं लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई गैरंटी तब भी नहीं थी जब चुनाव शुरू नहीं हुआ था और आज भी नहीं है जब चुनाव का परिणाम आ चुका है। 

पिछले 48 घंटों मे, जिस प्रकार से टीएमसी ने खेला होबे का अभियान  उन सब के विरुद्ध शुरू कर दिया है जो टीएमसी के साथ नहीं खड़े थे और भाजपा, वामपंथी और अन्य राजनीतिक दलों के साथ समर्थन करते हुए नज़र आ रहे थे। 

सूत्रों से यह भी पता चला है कि लोगों को तभी चिन्हित कर लिया गया था जब चुनाव के दौरान वो सब बंगाल मे परिवर्तन के लिए जैसे तैसे साहस जुटाकर खुले रूप से भाजपा का समर्थन कर रहे थे। मेरे कुछ साथी अपनी जान बचाने के लिए 2 मई को ही रुझान देखने के बाद कोलकाता के बाहर भी चले गए। चले क्या गए है छिप गयें हैं क्यूंकि उन्हे पता है कि न वहाँ की पुलिस से कोई सुरक्षा मिलनी है और ना ही राजनैतिक दल से। 

पिछले 48 घंटे मे जो हुआ वह अब त्वरित गति से तिगुने और चौगुने दर से बढ़नेवाला है। 

बंगाल मे  टीएमसी को मीडिया से भी जितना साधना था वह साधा जा चुकी है और अब उनपर भी दबाव बनाया जा रहा है। टीएमसी का साथ देनेवाला मुख्याधारा की मीडिया आज भी राष्ट्रिय स्तर पर वहाँ की घटनाओं पर मौन है और नहीं उनका कोई कैमरा चल रहा है और न ही कलम। सब की शक्तियाँ क्षीण हो गईं हैं और इन सबका दोगला चरित्र सामने आ चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी और अमिता शाह की बात इसलिए करना चाहता हूँ कि जब से यह टीएमसी की जीत हुई है और हर जगह हत्या, सामूहिक बलात्कार, लूटपाट, मार पीट, संपत्ति, वाहन और कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, दोनों मूक दर्शक बनकर दिल्ली से देख रहे हैं। आहवाहन तो दूर एक ट्वीट तक नहीं आया। 

बड़े बड़े मंचो पर चढ़कर जब इन्होने दीदी ओ दीदी कहकर ललकारा था, जनता से ठहाके लगवाए थे, जय श्री राम का नारा लगवा लगवा कर लाखों की संख्या मे उमड़े भीड़ को अतिविश्वास की घूंट पिलाई थी,  तब क्या इन्हे पता नहीं था कि यदि भारतीय जनता पार्टी सत्ता मे नहीं आई तो इन लोगों के साथ टीएमसी के गुंडे किस प्रकार का दुराचार करेंगे, कितनों की खून से खेला होबे का खेल होगा? क्या इन्होने ने कोई प्लान 'बी' बनाकार नहीं रखा था जिस से कि उनके कार्यकर्ताओं को, समर्थकों  को और मतदाताओं को सुरक्षित रखा जा सके?

क्या बीजेपी बंगाल मे पिछले कई सालों से अपने 138 कार्यकर्ताओं की हत्याओं को नहीं जानती थी? क्या इस से स्पष्ट नहीं था कि यदि पराजय होगा तो इन सबके साथ क्या होगा? क्या पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह अनभिज्ञ थे। 

और अगर उन्हे तब नहीं पता था तो क्या अब जो हो रहा है और बंगाल मे होती हिंसा का विडियो जो सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आ रहा है और देश भर की जनता बंगाल मे होती हिंसा के विरुद्ध यह गुहार लगा रही है,  क्या इन दोनों के कानों तक नहीं पहुँच रही? क्या यह सब होते हुए आप दोनों को दिखाई नहीं दे रहा? क्या आप मनमोहन सिंह की तरह मौनी बाबा बन गए हैं? या क्या आप दोनों आज पप्पू बन गए है जिसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली की समझ न हो? 

इस प्रदेश के  राज्यपाल जिन आला पुलिस अफसरों को मिल रहें है वो पक्षपाती है, इनका दल-बल टीएमसी के कठपुतली है। राज्यपाल को सही रिपोर्ट तक नहीं मिलेगा। और राज्यपाल किस रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा  करेंगे? इन दोगले चरित्र वाले अधिकारियों के रिपोर्ट के आधार पर?

ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों को अगर सही तरह से निभाती तो बंगाल की जनता आपको समर्थन देने के लिए क्यूँ खड़ा होती? ममता आज कोप भवन मे छिपी हुई है क्यूंकि वह चाहती हैकि जो राजनैतिक नरसंहार का  खेला हो रहा है वह चलता रहे और इतना चले कि कोई ममता का विद्रोही बच न सके और अगर बच भी जाये तो मन मे डर इतना भर जाये कि विद्रोह का बात सोच भी न सके। क्या ममता बनर्जी की तरह आप दोनों भी असंवेदनशील हो गयें हैं, गैरजिम्मेदार हो गए हैं कि इतने  सारे जान माल के नुकसान से भी आप दोनों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रहा? क्या आप भी मूक बनकर उन सभी से भाजपा के पराजय का प्रतिशोध ले रहे हैं? 

प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी जागिए। उठिए और कुछ कीजिये। भाजपा की जीत हुई है लेकिन पराजय मानकर अब यह पराजय का खेल आप दोनों शुरू कर चुके है। पार्टी से ऊपर देश है और देश तब है जब जनता सुरक्षित है,और आप तब तक है जब तक कि जनता का विश्वास आप मे हैं। 

आपके प्रत्याशियों के साथ मार पीट हो रहा है, उनके घरों पर बम फेंका जा रहा है, महिला प्रत्याशियों के साथ सामूहिक रूप से दरिंदगी हो रही है, आपके प्रत्याशियों के समर्थकों को चिन्हित करके घर से निकाल निकाल कर मारा जा रहा है और यह सब उन सबके साथ इसलिए हो रहा है क्यूंकि इन सभी लोगों ने आपका साथ दिया है। आपके समर्थन मे खड़ा होना टीएमसी के गुंडों की नज़र मे इन सबका सबसे बड़ा अपराध है और उन्हे चुन चुन कर सरेआम सजा दी जा रही है। 

आज सोई हुईं सुप्रीम कोर्ट कब जागेगी? इस राज्य की जनता  त्राहि माम - त्राहि माम चीख रही है और यह सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान मे क्या नहीं आता? 

यदि इस देश के कानून मे, संविधान मे चुनाव मे जीती हुई राजनैतिक पार्टी के द्वारा हत्या, हिंसा, लूटपाट, बलात्कार और आगजनी करने पर कोई कड़ी कारवाई या इस चुनी हुई पार्टी के इस अराजकता पर चुनाव परिणाम को निरस्त करने का प्रावधान नहीं है तो हमारा विश्वास, जनता का विश्वास इस कानून और संवैधानिक व्यवस्था से उठ जाएगा और फिर कहीं ऐसा न हो कि अपने भाइयों और बहनों को बचाने के लिए लोग सड़क पर निकाल कर लड़ मर पड़े। 

यह एक गृह युद्ध की शुरुआत सी होगी, आपका विकास काम नहीं आएगा। कहीं यह अराजकता कोरोना के संक्रामण की गति से भी तेज गति से पूरे देश मे फैल न जाए? यह संभाले नहीं संभालेगा और आप अपनी छवि जो नोबल पुरस्कार के लिए बना रहें हैं वह कहीं मिट्टीपलित न हो जाए। 

सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास अब तार तार होने से पहले आप सब कुछ बचा लीजिये। लोगों की आशा यही है आप दोनों से।