बंगाल मे बीजेपी के हिन्दू समर्थकों की हत्या पर मौन होना, क्या प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का मुस्लिम तुष्टीकरण नहीं?

कैसे बिना ईफतार पार्टी के, कैसे बिना किसी दरगाह पर गए, कैसे बिना सर पर जालीदार टोपी लगाए, कैसे ईद पर बिना गले लगाए, कैसे बिना मौलानाओं और मुफ़्ती को शामिल किए मोदी तुष्टिकरण का सशक्तिकरण करते रहें है?

बंगाल मे बीजेपी के हिन्दू समर्थकों की हत्या पर मौन होना, क्या प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का मुस्लिम तुष्टीकरण नहीं?

यह एक बेशर्मी से प्रचारित मिथक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुस्लिम समुदाय के साथ रिश्ते सबसे खराब हैं। आप मेरी इस लेख का या विपरीत राय का तिरस्कार और उपहास कर सकते हैं। पिछले कई वर्षों मे उनके कार्य प्रणाली पर बारीकी से समीक्षा करने के बाद, मुझे विश्वास हो गया है कि झूठे आख्यानों के मकड़जाल से मुक्त होने का यह सही समय है। 

बंगाल की परिस्थिति या देश भर मे हिंदुओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक परिस्थिति क्या है, इस पर मैं अभी कुछ नहीं कहूँगा। हाँ, मैं इसके लिए पहले कुछ करनेवाला हूँ वो है एक गहन समीक्षा, एक तुलनात्मक समीक्षा जिसे शायद मैं एक पुस्तक के रूप मे आप सभी के सामने प्रस्तुत करूँ। लेकिन लौटते है हम अपने इस भ्रम-जाल, माया-पाश, की तरफ और खुद से दस बार यह सवाल करते है कि क्या मोदी तुष्टीकरण की नीति नहीं अपनाते हैं?    

मोदी को मुस्लिम विरोधी के रूप में यथासंभव हर समय हर जगह चित्रित करने की सुनियोजित योजना की गई है और वो सभी इनके चरित्र को प्रमाणित करने मे सफल रहे है। इस देश के हिंदुओं के दिमाग मे यह बात पैठ कर गई है कि मोदी मुस्लिम विरोधी है और हिंदुओं के पक्ष मे काम करनेवाले है। उन सभी के लिए जो इस प्रकार से मोदी का जो चरित्र निर्माण देश की जनता के सामने प्रदर्शित करना चाह रहे थे वह इस कथन को प्रतिपादित करने मे सफल हुए। उन्हे हिंदुओं के मन ये इसलिए लाना था कि मुस्लिम कौमी एकता पूर्णतः संघठित रहे। और वह है भी। शाहीन बाग के बाद बंगाल का चुनाव परिणाम ही देख लीजिये।    

अब हम उन तथ्यों का परीक्षण करेंगे जो यह साबित करता है कि कैसे मोदी का मुस्लिम समुदाय के साथ अच्छा रिश्ता है। अपने राजनीतिक और प्रशासनिक कैरियर में हर कदम पर, पीएम मोदी ने समुदाय के कल्याण के लिए वह सब कुछ किया है जो वह कर सकते हैं। हां, उनकी कार्यशैली पारंपरिक दृष्टिकोण के अनुकूल नहीं है - यह एक ताज़ा विकल्प प्रदान करता है कि कैसे बिना ईफतार पार्टी के, कैसे बिना किसी दरगाह पर गए, कैसे बिना सर पर जालीदार टोपी लगाए, कैसे ईद पर बिना गले लगाए, कैसे बिना मौलानाओं और मुफ़्ती को शामिल किए मोदी तुष्टिकरण का सशक्तिकरण करते रहें है। 

यह किसी को व्यापक रूप से ज्ञात नहीं है कि वडनगर में मोदी का घर एक ऐसे क्षेत्र में स्थित था जहां कई मुस्लिम थे। उनके कुछ पहले और लंबे समय से स्थायी दोस्त मुस्लिम हैं। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो जिन दो जिलों के विकास सूचकांकों की शूटिंग हुई, वे थे कच्छ और भरूच। ये उच्च मुस्लिम आबादी वाले जिले हैं।

कच्छ, भारत के पश्चिमी-सबसे अधिक जिलों के बीच, 1947 के बाद की दो चीजों के लिए जाना जाता था - "रेगिस्तान" और "पाकिस्तान" (रेगिस्तान और पाकिस्तान के साथ एक लंबी सीमा)। पर्यटक कभी वहां नहीं जाते। अधिकारी वहां सेवा नहीं देना चाहेंते थे। मोदी के सीएम बनने तक यही था। लेकिन 2001 के बाद, कच्छ का कृषि समृद्ध हुआ, उद्योग जिले में आया, इसकी तटीय शक्तियों का दोहन किया गया और यह एक जीवंत पर्यटन स्थल के रूप में उभरा।

भरुच में समस्या कानून और व्यवस्था की थी। पिछली कांग्रेसी सरकारों और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने भरूच को बिगड़ने दिया। भरूच में  1980 से 1990 के दशक में पले-बढ़े बच्चे वहां के कर्फ्यू को कभी नहीं भूल सकते। इस तरह के परिदृश्य ने व्यापक पैमाने पर विकास को रोका।

गुजरात में हिंदू और मुसलमान दोनों मित्र, अक्सर मुझे मुस्लिम समुदाय से जुड़े प्रमुख स्थलों को विकसित करने के लिए मोदी द्वारा किए गए प्रयासों के बारे में बताते हैं। अहमदाबाद में सरखेज रोजा ने सीएम के रूप में मोदी के तहत बड़े पैमाने पर कायाकल्प और बहाली का काम देखा। मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ एक बार कुछ अवसरों पर सरखेज रोजा का दौरा किया। एएसआई के साथ मिलकर काम करते हुए, अहमदाबाद नगर निगम ने रोजा और इसके आसपास के क्षेत्रों को बेहतर बनाने के लिए कड़ी मेहनत की। पारंपरिक त्योहारों की शुरुआत की गई, जिससे रोजा अहमदाबाद में एक जीवंत सांस्कृतिक स्थल बन गया। सिदी सैय्यद मस्जिद को भी एक नया रूप मिला। पीएम के रूप में, मोदी जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे को भी मस्जिद ले गए। कच्छ हाजीपीर दरगाह का घर है। कच्छ के सभी हिस्सों की तरह, इसे बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ा। मोदी ने स्थानीय सड़क नेटवर्क में सुधार किया, जिससे भक्त दरगाह में जा सके।

हमारे पीएम के रूप में, मोदी के पास समय है और उन्होंने फिर दिखाया कि वे पूरे देश के नेता हैं। मैं दिल्ली में आयोजित इस्लामिक हेरिटेज सम्मेलन में पीएम मोदी की बातों को कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने कहा (युवा) मुसलमानों को पवित्र कुरान और कंप्यूटर से अच्छी तरह वाकिफ होना चाहिए। उनके शब्द समुदाय में गूंजते रहे हैं।

उनके नेतृत्व के मूल में मानव गरिमा का सम्मान है। पीएम मोदी के ट्रिपल तालक को खत्म करने के एकल कदम ने सुनिश्चित किया है कि मुस्लिम महिलाओं की पीढ़ी बेहतर जीवन जीए। इसी तरह, बिना मेहरम के हज पर महिलाओं को आगे बढ़ने की अनुमति देने के फैसले को उनके सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया गया है।

पीएम मोदी ने दरगाह अजमेर शरीफ के साथ भी एक करीबी रिश्ता विकसित किया है। वहां बनाए गए 188 शौचालयों ने भक्तों, विशेषकर महिलाओं की मदद की है। दरगाह पर एक व्यापक सौंदर्यीकरण प्रक्रिया हुई है, जिसमें अस्ताना शरीफ़ में "सिल्वर कटहारा" का निर्माण, एक नया फव्वारा और निज़ाम गेट और अकबरी मस्जिद का नवीनीकरण शामिल है। प्रतिष्ठित महल में सफाई मशीनों को "झालरा" में रखा गया है और तीन लाख लीटर की क्षमता वाले पानी के टैंक का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, पीएम मोदी पिछले छह वर्षों से अजमेर शरीफ में सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर "चादर" चढ़ा रहे हैं। यह सभी देवताओं और सूफी संतों के प्रति उनके सम्मान और उनकी आज्ञा का स्पष्ट प्रतिबिंब है।

आप और हम बस लगे रहतें हैं हिंदुओं को यह बताने मे, समझाने मे, और विश्वास दिलाने मे कि जिसने पृथ्वी राज चौहान, उनकी सेना और उनके परिवार की स्त्रियों के साथ जिसने बर्बरता की है, इस दरगाह के कब्र मे वो दफन है। पिछले कई सालों से नरेंद्र मोदी से नफरत करना कुछ वर्गों के बीच फैशन बन गया है। उनसे मेरा विनम्र सवाल है: आप कब रुकेंगे?

2002 के बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अधिकांश जांचों को संभाला। नानावती आयोग का गठन किया गया था, जिसके सामने एक एसआईटी थी, जिसे मोदी ने खुद 9 घंटों के लिए अपदस्थ कर दिया था। आयोग और एसआईटी के निष्कर्ष सार्वजनिक डोमेन में हैं। फिर भी, इनमें से किसी भी निष्कर्ष पर विश्वास करने से इनकार कर दिया गया है।

ध्यान रखिए जब जब आप यह सुनते है कि आज के मुसलमान, विशेष रूप से उनमें से युवा, वोट बैंक की राजनीति से तंग आ चुके हैं। निहित स्वार्थों ने उनके वोट छीन लिए और उन्हें डरा दिया लेकिन कुछ नहीं दिया या फिर समुदाय शांति,  समृद्धि और अवसर चाहता है या यह भी कहे जाते हुए आप सुनेंगे कि वोट बैंक की राजनीति की पुरानी "दुकानदारों" की दुकान बंद करने का समय है यह एक भ्रम जाल है। वास्तव मे मुसलमानो ने मोदी मे मन मस्तिस्क के उस भाग को स्पर्श  किया हैजिसे हिन्दू नहीं जानते। मोदी मुस्लिम विरोधी है कह कह कर भारत के मुसलमान यह करने मे सफल हो गए कि मोदी खुद को यह साबित करने मे लगा दिया और हिन्दूहृदय सम्राट मोदी ने बड़े बड़े कल्याणकारी योजनाए और स्कीम और फिर इसके लिए बजट मे बड़े बड़े धनराशि आवंटित की है। एक नए भारत में आकांक्षा और समावेश, सबका विकास का नारा। मोदी ने एक शुरुआत की। 

क्या आपने गौर किया कि मुस्लिम छत्रों को आईएएस बनाने के लिए भी विशेष फंड दिया गया है? लड़कियों की पढ़ाई हो, निकाह हो। आप सोचिए आपको क्या क्या मिला? 

मोदी के नेतृत्व वाली विदेश नीति के कई विश्लेषण हुए हैं लेकिन एक पहलू यह है कि मुस्लिम दुनिया के साथ बेहतरीन संबंध हैं। बहरीन, यूएई, फिलिस्तीन, सऊदी अरब और अफगानिस्तान ने उन्हें अपने शीर्ष सम्मानों से सम्मानित किया है। UAE के साथ-साथ सऊदी अरब के प्रमुख राजकुमारों की पीएम के साथ मजबूत व्यक्तिगत मित्रता है। क्या यूएई में भव्य मस्जिद में पीएम मोदी की विशेष यात्रा को कोई भूल सकता है? क्या हम बहादुर शाह जफर की मजार पर पीएम को श्रद्धांजलि देना भूल सकते हैं?

पिछले वर्ष  केरल के पंचायत, मुनिसिपल और कॉर्पोरेशन की चुनाव मे 112 मुस्लिमों को और 500 क्रिश्चियन को प्रत्याशी बनाकर उतारा। परिणाम क्या हुआ सभी जानते हैं। इस प्रकार की राजनीति करने वालों का न कोई आदर्श है और न चरित्र।  क्या भाजपा पूर्णतः हिंदुवादी राजनीतिक दल है? हिन्दू सुषुप्तावस्था मे होते है, राजनीतिक रूप से आलसी प्रवृति के होते है, स्वार्थ कूट कूट कर भरा होता है, तत्काल मृत्यु और तत्काल सब कुछ खोने का भय दिल दिमाग मे भरा होता है और सदैव किसी अवतार की प्रतीक्षा मे हिन्दू अपने कर्मों मे निष्क्रिय हो जाता है और यही सब मूल कारण है जिससे कि हिन्दूओं कोई भी बहुत सरलता से अपना गुलाम बना लेता है।   

हिन्दू हमेशा आशावादी रहता है कि उसकी दुखों को खत्म करने, उसके धर्म के शत्रुओं से युद्ध करने, उस पर हो रहे अन्यायों से मुक्ति दिलाने के लिए एक ईश्वर का अवतार होगा भले हीं इस युग के अंत मे हो और वही सब कुछ ठीक कर देंगे। वही ईश्वर का रूप होगा। कर्म करने की शिक्षा दे कर गए भगवान श्री कृष्ण को अब दया आती होगी किन मूर्खों के लिए गीता का उपदेश किया।