केजरीवाल को कोरोना पर बैठक के दौरान मांगनी पड़ी प्रधान मंत्री मोदी से माफी - विश्लेषण

केजरीवाल को प्रोटोकॉल नहीं पता यह हो नहीं सकता। जिस षड्यंत्र को अपने मस्तिष्क मे रखकर उसी पॉर्शन को लाइव किया जो उन्हें जनता को बतानी थी उससे यह लगता है वह अपना सिक्का चमका रहे थे और साथ ही साथ अवसर तलाशने में लगे हुए थे कि इस लाइव से अनभिज्ञ प्रधानमंत्री कुछ ऐसी बातें बोल दें जिसे वह सार्वजनिक करके मोदी जी के खिलाफ राजनीति कर सके। जहाँ प्रधानमंत्री अपनी संयमित आदतों के लिए जाने जाते है वहीं केजरीवाल को अब लोग ओछी व निम्नस्तरीय राजनीति के लिए जानने लगे है।

केजरीवाल को कोरोना पर बैठक के दौरान मांगनी पड़ी प्रधान मंत्री मोदी से माफी - विश्लेषण

आज दिन भर यह खबर मुख्य मीडिया में तो नहीं रही, मुख्य मीडिया कहने का तात्पर्य है वह बड़े बड़े चैनल जिस पर केजरीवाल दिन भर मे कई बार यह कहते हुए सुने जाते हैकि कोरोना दुबारा आगया। देखा जाये तो जैसे ये आते हैं उन्हे देखकर यही लगता है कि सच है कि कोरोना दुबारा आ गया। 

लेकिन कई साहसी एवं उन्मुक्त वरिष्ठ पत्रकारों ने, जिन्होने यूट्यूब पर अपना चैनल बना रखा है, उस पर यह खबर खूब चली और ज़ोर शोर से चली क्यूंकि केजरीवाल की यह करतूत किसी ने सपने मे भी नहीं सोचा होगा।

वैसे, केजरीवाल इस प्रकार के निम्नस्तरीय कार्यों के लिए तब से मशहूर है जब से इन्होने अपनी पार्टी बनाई थी। इसी प्रकार की उलूल-जुलूल, ओछी हरकतों से दिल्ली की जनता मे ये इतने लोकप्रिय हो गए कि इस देश की चुनावी इतिहास मे भी जो न हुआ था वह हो गया और एक बार नहीं दो दो बार। इन्हे दिल्ली की जनता ने  पूरी ताकत से जिताया। इस जीत के लिए अरविंद केजरीवाल का कोई बड़ा योगदान नहीं है। केवल जनता का ही योगदान है तभी केजरीवाल ने जो कभी भारतीय राजस्व सेवा मे सफल कार्यपालक की तरह कोई अभूतपूर्व योगदान नहीं दिया वह भारत की राजनीति मे राजनीति की नीति बदलने की शोर पर, ध्यान रखिए विचार पर नहीं, सीधा पहली बार मे मुख्यमंत्री बन बैठे। यहाँ तक का कमाल जनता के बटन से हुआ।

उसके बाद का कमाल तब हुआ जब एक मुख्यमंत्री अपने ही खिलाफ धारणा प्रदर्शन करने निकल पड़ा। दूसरा कमाल यह भी था। जनता भ्रम मे थी लेकिन ऐसे कई मूर्खतापूर्ण कमाल को करते हुए आज केजरीवाल ने जो किया वह देश विरोधी से कम नहीं था।     

आप सोच नहीं सकते हैं कि आज केजरीवाल ने अपने अपरिपक्वता की नई कहानी देश के सामने कैसे पेश की है और लोग अचंभित रह गए, सबकी आंखे फटी की फटी रह गईं, किसी किसी का मुंह खुला का खुला रह गया। कुछ लोग जैसे थे वैसे ही रह गए। दुनिया थमी नहीं बस यही जान लीजिये। जी, गलती नहीं अपराध किया अरविंद केजरीवाल ने, वो भी हमारे देश के सबसे संयमित, सबसे सहिष्णु, जरूरत से ज्यादा परिपक्व प्राधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने। 

अपराध पकड़ा गया और अपराधी भी जो बस बेहूदा बात बनाते हुए और असंवेदनशील आंसुओं के साथ यह दुख जताते हुए कि कोरोना से जिन लोगों का देहांत हुआ है उसके लिए शोक प्रकट करता है और खुद ही अपने अपराध को कम आँकते हुए, अपराध को गलती बनाते हुए और अपनी गलती मानते हुए केजरीवाल घड़ियाल से कम नहीं लग रहा था।    

हुआ यह कि आज प्रधानमंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्रियों की कोरोना पर गंभीर बैठक होनी थी। शायद कुछ निर्णायक कार्य होना था और जाहीर है प्रधानमंत्री ने इस विपदा काल में चाय पर चर्चा करने के लिए या फिर मन की बात करने के लिए तो निमंत्रण नहीं भेजा होगा। जब इस मीटिंग के दरम्यान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अपने राज्य की बातें और परेशानियों पर चर्चा करने का अवसर मिला तो वह एक भाषण के तर्ज़ पर क्या होना चाहिए उसकी बातें करने लग गए। 

पिछली बार की तरह वह इस बार भी वैसे ही थे शून्य पर, शायद बुद्धिहीनता के शून्यशिखर पर। उनकी बातें सुनकर यह लगने लगा कि वह इस मीटिंग के लिए किसी भी तरह से तैयार नहीं है क्यूंकि जो जो बातें वह कह रहे थे वह सभी के सभी भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों द्वारा क्रियान्यवयन में है जैसे रेलवे द्वारा ऑक्सिजन एक्सप्रेस चलाना। ग्रीन कॉरिडॉर बनाना जिससे कम समय मे बिना रुके ट्रक और ट्रेन दोनों ही समय पर गंतव्य शहरों तक पहुँच जाएँ।

अरविंद केजरीवाल को इन सब कार्यों के बारे मे पता न हो वैसे ये भी नहीं हो सकता। 

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने अपने चर्चा के समय पर अपनी बातों को टेलिकास्ट कर दिया। जी हाँ सही समझा आपने लाइव टेलिकास्ट कर दिया। शायद यह करने की प्रेरणा प्रशान्त किशोर वाली घटना से प्राप्त हुई हो वो भी उस मीटिंग मे जिसमे देश का प्रधानमंत्री हो, गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली मीटिंग हो। वह जो भी प्रधानमंत्री को बोल रहे थे वह सब कुछ चारदीवारी के बाहर, टीवी मे, मोबाइल मे, यूट्यूब पर, पूरे देश को ही नही बल्कि पूरी दुनिया भर मे प्रसारित हो रहा था।

केजरीवाल की यह सोची समझी मनमानी घटना असंवैधानिक है, पद और गोपनियता की शपथ को भंग करनेवाली घटना है, और निम्न स्तर की राजनीति भी है, जो अरविंद केजरीवाल ने किया वो दुनिया भर के किसी भी राजनीति करनेवाले ने देश के खिलाफ नहीं किया होगा। यह एक देशद्रोह की घटना भी तो मानी जा सकती थी जो दुश्मन देशों के साथ मिलकर चला गया हो लेकिन हम आप सोच अवश्य सकते है। यदि इस पर प्रधानमंत्री ने सवाल हमारी तरह किया होता तो वह आज ही हिटलर भी हो जाते। 

और दिन भर देश के मुख्य समाचार चैनलों पर प्रधानमंत्री हिट लिस्ट मे रहते, और ममता को हिट विकेट करने का मौका मिल जाता।  इसके मतलब तो कई निकाल सकते है। यह एक गंभीर अपराध है वो भी देश के संवधानिक पद पर आसीन एक मुख्यमंत्री के द्वारा। 

यह घटना बिलकुल उसी प्रकार की है जैसे विद्यालय मे प्राचार्य या अध्यापक से छिपकर कोई एक उद्दंड विधार्थी सिगरेट पी रहा हो और फिर पकड़ा भी जाये। केजरीवाल आज बिलकुल वैसे ही लग रहे थे उस वक़्त जब प्रधानमंत्री ने ठीक उसी प्रकार उनकी कनौठी लगाई जैसे कभी आपको याद हो किसी अध्यापक द्वारा उद्दंड विधार्थी को लगते हुए देखा हो और विद्यार्थी पकड़े जाने की वजह से मानसिक संतुलन खोते हुए आँय - बाँय और बिना सर पैर की बात करने लगता हो।    

यदि यह घटना किसी निजी कंपनी में अरविंद केजरीवाल ने किया होता तो उसका एक ही परिणाम होता, सीधा कंपनी से बाहर, नौकरी से हाथ धो बैठते केजरीवाल। किन्तु यह शासकीय व्यवस्था में है, जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि है, मुख्यमंत्री है, इन्हे सात खून भी माफ है कानून के द्वारा नहीं, जनता के द्वारा क्यूंकि केजरीवाल मुफ्त मे पानी देता है, बिजली देता है, बस की किराया माफ कर देता है और मुफ्तखोरों को क्या फर्क पड़ता है। 

मुफ्त में जनता बिक जाती है, मुफ्त के चक्कर मे कुटिल या मूर्ख, या दोनों ही कुटिल मूर्ख मुख्यमंत्री बन जाता है। मुफ्त किसी भी बीमारी का इलाज नहीं होता लेकिन बीमारी अगर मुफ्तखोरी की लग जाए तो समझ लेना चाहिए कि पूरा समाज, या राज्य अब मुफ्त में बीमार हो गया है।   

केजरीवाल ऑक्सिजन की मांग करते करते आज कोरोना काल मे ऑक्सिजन की वजह से बच गए। 

केजरीवाल को आज तो माफी मिल जाती है परंतु भविष्य मे दो लोग इसी केजरीवाल के सामने होंगे। एक केजरीवाल की खुद की करनी और एक भाग्यविधाता, मतदाता जो शायद माफ नहीं करे।