और 74 वर्षों से सरकारें बंदरों को बंदूक देती रही है, हम इन बंदरों को बेलन से तो नहीं हरा सकते।

मैं bookspadhiye.com की माध्यम से प्रयत्न करूंगा कि अधिक से अधिक संख्या में पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध रहें। यहाँ सभी भाषा की पुस्तकें सभी विषयों पर उपलब्ध रहेंगी जो हिंदुओं की ज्ञानचक्षु खोलने मे समर्थ होंगी।

और 74 वर्षों से सरकारें बंदरों को बंदूक देती रही है, हम इन बंदरों को बेलन से तो नहीं हरा सकते।

मैं मगध की धरती पर पैदा हुआ सुमित सिन्हा हूँ, महाराष्ट्र मे रहता हूँ, राष्ट्रहित व धर्मरक्षा हेतु सदैव सक्रिय हूँ। मेरे आचार्य चाणक्य है और आज के जो मेरे जो आदर्श पुरुष है वह है महान क्रांतिकारी, स्वतन्त्रता सेनानी, राष्ट्रवादी, देशभक्त, हिन्दू धर्म पारायण इवान हिन्दूओं के प्राणरक्षक स्वर्गीय नाथू राम गोडसे है जिनहोने उस वक़्त के हिंदुओं के लिए और इस देश की एक एक इंच भूमि की सुरक्षा के लिए स्वयं को बलिदान कर लिया।

और जिनके मार्ग पर मैं चलता हूँ वह सम्राट अशोक है जिन्होने भारत को अखंड बनाए रखने के लिए उस वक़्त की सरकार मे बैठे लिब्रांडू स्त्री-पुरुषों को एक साथ भस्म कर दिया था। और सोने की चिड़िया वाली भारत का पुनर्निर्माण किया था। 

तब तलवारों से युद्ध लड़ा जाता था और आज टिवीटर पर युद्ध लड़ा जाता है, तब गर्दनें काट दी जाती थी आज शत्रुओं की बातें भी काटने के लिए हिंदुओं के पास ज्ञान नहीं है, तब रक्तबीज का समूल विनाश होता था और आज उसके वृहत परिवार का विकास हम हिंदुओं के मंदिरों और कर-राशियों से किया जा रहा है।  

तब सब कुछ स्पष्ट था ऐसा नहीं है आज हीं की तरह तब भी राष्ट्रवादी भाषा और भ्रम से घिरे शत्रुओं के मध्य मे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे थे।      

अशोक एक महान शासक थे, वो अपने शत्रुओं को जानते थे और आज का शासक भी जानता है लेकिन आँखमूँदकर दूध पीने वाली बिलाव जैसा है हिंदुओं को ऐसे शासक की आवश्यकता नहीं है, नहीं है, और नहीं हैं यदि अपनी पहचान बचाए रखनी है। 
       
इसलिए, मैंने एक निश्चय किया है कि हम सभी लोगों तक वो सारी पुस्तकें पहुंचे जो हिंदुओं की *चिरकाल से सुषुप्त अथवा मृत साहस और वीरता* को जागृत अथवा पुनर्जीवित करने की मंत्रों से भरा-पटा हो और इस प्रयत्न को यथार्थ रूप देनेके लिए मैंने एक वैबसाइट तैयार करने का निश्चय लिया है।

bookspadhiye.com मैं प्रयत्न करूंगा कि अधिक संख्या में पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध रहें। यहाँ सभी भाषा की पुस्तकें सभी विषयों पर उपलब्ध रहेंगी जो हिंदुओं की ज्ञानचक्षु खोलने मे समर्थ हो। 

इस साइट पर पुस्तकें डिजिटल रूप मे ही मिलेंगी। पढ़ने का अनुभव बिलकुल वास्तविक पुस्तकों की भांति ही होगा। आप जब जब अगले पन्ने पर जाएँगे आपको वही जानी पहचानी कर्णप्रिय ध्वनि सुनाई देगा। इसमे कई खूबिया है आप इस वेबसाइट पर आकार स्वयं देख सकते हैं। 

आगे हम बहुत जल्द स्ववाचन करतीं हुईं पुस्तकों कों भी उपलब्ध कराएंगे। सभी के आशीर्वाद और सहयोग से यह काम यथासंभव पूर्ण किया जा सकता है।      

इस वेबसाइट का ध्येय केवल पुस्तकों को नि:शुल्क उपलब्ध करना नहीं, बल्कि जागृत करना है, पाठकों को मलेच्छों से कुतर्क युद्ध मे लड़ने हेतु, लिब्रांडूओं की जिहादी मानसिकता से सुरक्षा हेतु और आत्मरक्षा हेतु आत्म निर्भर बनाना है क्यूंकि भारत मे कोई भी सरकार जिहाद रोकने मे सक्षम नहीं हो सकती। सरकार को "उनके विकास" की चिंता है, हिंदुओं की नहीं। 

किसी जरूरतमन्द हिन्दूविध्यार्थी को छात्रवृति नहीं मिलती बल्कि उसे आरक्षण का अवरोध भी मिलता है और वह मेधावी छात्र सृजनात्मक सक्षमता का स्वामी होने के बावजूद, सकारात्मक विचार को पल्लवित व पोषित करने के उपरांत भी, राष्ट्र पर सम्पूर्ण न्यौछावर होने वाला संस्कार लिए हुए वह जिहादियों के हत्थे चढ़ जाता है। श्रद्धेय स्वर्गीय कमलेश तिवारी जी उदाहरण है। 

ऐसे देशभक्त माँ भारती के पुत्र कभी सरकार की वजह से, उनके नए मंत्र *सबका विकास* के कारण सही पदों तक पहुँच नहीं पाते है और 74 वर्षों से सरकारें बंदरों को बंदूक देती रही है, पिछले 6 साल से महापरिवर्तन होने के उपरांत भी, आज की भी सरकार देने के लिए सदैव तत्पर बैठीं है, और हम हिन्दू इन बंदरों को बेलन से तो नहीं हरा सकते, हम तो निहत्थे ही हैं।  

यह पुण्य का काम हम हिंदुओं को स्वयं करना होगा।  हमारा समर्थन और सहयोग करते रहे। और यदि हो सके तो पुस्तकदान अवश्य करें।